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शनिवार, 21 मई 2016

भगवान का घर और मन में चोर!




 
          एक सप्ताह पूर्व शनिवार 14 मई के दिन मैं चेन्नै में था। अपने मित्र श्री कार्तिकेयन के द्वारा की गई व्यवस्था के अनुसार मैं चेट्टिनाड म्यूजियम देखने के बाद महाबलिपुरम गया और वहाँ घूमने के बाद वापस चेन्नै लौटते समय उस दिन के लिए मेरे सारथि जयमोहनजी मुझे इस्कान मंदिर ले गए । भव्यता और सौंदर्य से युक्त मंदिर आकर्षक है। मंदिर पहुँचने पर मैंने चित्र लेने चाहे पर समस्या यह थी कि मोबाइल और कैमरे दोनों ही की बैटरियाँ मेरे सुपुत्र प्रत्यूष द्वारा जमकर फोटोग्राफी करने के कारण समाप्त हो चुकी थीं। मैंने मंदिर में देखा कई स्थानों पर प्लगहोल की व्यवस्था संभवत: पंखे आदि या अन्य बिजली उपकरणों के लिए की गई थी । स्वत: मन में आया कि यहाँ मोबाइल की रिचार्जिंग की जा सकती है। मंदिर में प्रवेश करते समय मैं एक सूचना पढ चुका था कि मंदिर में मोबाइल आफ कर रखना है। इस कारण मन में शंका थी कि मोबाइल चार्जिंग के लिए लगाना उचित होगा या नहीं। मंदिर में भीड-भाड नहीं थी, पुजारी आदि भी कोई नहीं था । इसलिए अपने सारे संकोच को दरकिनार कर मैं मोबाइल चार्जिंग के लिए लगाने लगा।  प्रत्यूष ने मुझे टोक दिया और कहा कि यहाँ मोबाइल आफ करने के लिए लिखा है पर आप उसे चार्जिंग में लगा रहे हैं,किसी  से पूछ कर अनुमति होने पर ही लगाइए।

           बेटे की बात सही थी। एक महिला गार्ड वहाँ प्रवेश स्थल पर वर्दी आदि पहन कर बैठी हुई थी। चलो इसी से पूछ लेता हूँ, मैंने विचार किया और उसके पास चला गया। महिला गार्ड हिंदी या अंग्रेजी कुछ भी समझने में असमर्थ थी । उसने जवाब में मुझसे जो कुछ कहा उसमें से मैं केवल तमिल शब्द समझ पाया और कुछ मेरे पल्ले नहीं पडा। प्रत्यूष ने कहा यह सिर्फ तमिल बोल या समझ सकती है और यही बता रही है।खैर अब कोई चारा नहीं था इसलिए मैं वापस चला आया। मंदिर के गर्भगृह के सामने के सभास्थल के बिल्कुल पिछले हिस्से में मैं चला गया जहाँ इस्कान के संस्थापक प्रभुपादजी की प्रतिमा थी।पीछे की तरफ बडे गवाक्ष बने हुए थे जिनसे बडी सुंदर हवा आ रही थी। मैं मंदिर के खुशनुमा माहौल के विषय में विचार करने लगा। पूरे ही मंदिर में शीतल नैसर्गिक हवा बह रही थी जो चेन्नई और आस-पास के क्षेत्र में अन्यत्र अनुभव की गई गरमी की अपेक्षा मंदिर के वातावरण को सुखप्रद बना रही थी। इसी दौरान मेरी निगाह दोनों तरफ की दीवारों में बने प्लगहोल पर पडी और  मन में चोर जागृत हो गया। मैंने एक प्लगहोल में मोबाइल चार्जिंग के लिए लगाकर पास रखी हुई कुर्सी पर रख दिया। 

            इस बीच सायं के चार बज जाने के कारण आरती का समय हो गया था और पुजारी आ गए थे। दर्शनार्थियों की भीड मुख्य प्रतिमाओं के सामने चली गई पर मैं कुर्सी के बगल में हाथ जोडकर खडा हो गया। पर जैसे ही यह ख्याल आया कि मैं भगवान के घर में बिजली चुरा रहा हूँ मुझे राजीव गाँधी की सभा में हाथ जोडे खडी  धनु का ख्याल आ गया और यह विचार आया कि जब भी कोई बहुत विनम्रतापूर्वक हाथ जोडकर सामने खडा हो जाए उसके विषय में सतर्कता बरतनी चाहिए। फिर थोडा यह सोचकर मन को आश्वस्त किया कि भगवान भी तो माखन चुराते थे इसलिए अगर मैं उनके घर में थोडी बिजली ही चुरा ले रहा हूँ तो क्या वो माफ नहीं करेंगे ! आखिर इसका उपयोग भी तो उनकी तस्वीर और उनके घर के चित्रादि लेने में ही करूँगा । कितने ही लोग रोज 'त्वदीयं वस्तु गोविंदं तुभ्यमेव समर्पयाम' कह कर भगवान का भोग लगाते हैं।

        इस बीच मैंने देखा कि साक्षात मीरा सी दिख रही एक गौरांगना जिनकी उम्र भी अधिकतम तीस के आस-पास होगी, गहरे हरे रंग की सूती साडी बिल्कुल भारतीय शैली में पहने पधारींं। वे पहले तो भगवान के सामने गईं फिर वहाँ से पीछे चली आईं और मुझसे कुछ दूरी पर खडी होकर माला फेरने लगीं। मैं सोचने लगा कि क्या रहा होगा कि अपना घर-बार, अपने लोग और अपना देश छोडकर वे यहाँ भगवान की खोज में चली आई हैं। पर कुछ देर माला फेरने के बाद वे चली गईं जिससे लगाकि जैसे यह उनकी दिनचर्या का कोई भाग था जिसे पूरा कर वे चली गईं। इसी दौरान खाकी पैंट पहने हुए एक व्यक्ति आया जिसके चेहरे से स्पष्ट था कि वह स्थानीय था। वह लेटकर साष्टांग दंडवत करने लगा। मैंने सोचा कि रामास्वामी नायकर से लेकर अन्नादुरै के समय तक चले रेशनलिस्ट आंदोलन भी लोगों के धार्मिक विश्वासों को हिलाने में नाकाम रहे हैं और रेशनलिज्म तमिलनाडु की आबादी के एक छोटे हिस्से एवं डी के तथा डी एम के के शीर्ष नेतृत्व तक सीमित होकर रह गया है।

        इस दौरान मैंने अपने सुपुत्र को देखा जो वैसे तो कुछ बात होने पर स्टीफेन हाकिंस को उद्धृत करने लगते हैं , इस समय बडे श्रद्धाभाव से सर्वत्र श्रद्धावनत होकर प्रसाद आदि ले रहे थे। इनका बारहवीं का परीक्षाफल निकलने वाला है इसलिए फिलहाल सारी वैज्ञानिकता भूलकर 'डिवाइन इंटरवींशन' की तलाश में हैं। हममें से संभवत: अधिकांश लोग ऐसे ही हैं। अपने दुनियावी मामलों में जब भी जरूरत होने लगती है हम भगवान से हस्तक्षेप की आशा करने लगते हैं। खैर इस बीच मेरा मोबाइल जरूरत भर को चार्ज हो गया था जिसके लिए भगवान का धन्यवाद करते हुए मैंने यहाँ दिए गए फोटोग्राफ लिए । पर योगीराज श्रीकृष्ण के आगे किसकी चतुराई चलने वाली  है ! इसके बाद जब मैं मैरीना बीच पहुँचा तो मोबाइल फिर बोल गया। यानी कि भगवान ने बिजली का हिसाब बराबर रखा था, मुझे इतनी ही बिजली मिली कि मैं उनकी तस्वीरें ले पाऊँ बस!

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