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गुरुवार, 26 मई 2016

अच्छे दिन ( गजल)

हवा के खिलाफ चलकर पास आ जाने वाले हमेशा साथ निभाते हैं।
हवा के साथ बह भी आते हैं जर्द पत्ते ,जो हवा के साथ वापस चले जाते हैं।।

अच्छे दिनों में न भूलो कभी दुश्वारियों में साथ रहने वालों को।
अच्छे दिनों की आस में साथ आने वाले गमकशी में साथ छोड जाते हैं।।

जब दिन किसी के अच्छे हों, बताना उससे रिश्ता जमाने की फितरत है।
जो आ जाएं गर्दिश भरे दिन सिर्फ सच्चे रिश्ते वाले साथ रह जाते हैं।।

खाली दामन को भी जो थाम लें मुहब्बत से वो आखिर तक साथ निभाते हैं।
दामन भरा देख थामने वाले, दामन खाली होते ही तोबा कर जाते हैं।।

अच्छे दिनों  का वादा करने वाले ,अपने वादे को निभाने का हौसला रखना।
वादे तो यूँ  टूटा भी करते हैं पर सरताज भूले वादे तो मुल्क के अरमां टूट जाते हैं।।  
          -संजय त्रिपाठी

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